Hello दोस्तों ! (Learning Programming Concepts) प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज को सीखने के लिए अक्सर Students परेशान होते है. गूगल (Google) लेकर ढूँढते है तब भी ये तो समझ आ जाता है की प्रोग्राम कैसे समझें, या रट कर अपना काम चला लें! मगर प्रोग्रामिंग सीखने के लिए यह तरीका बेहतर नहीं है.
मै अपने इस पोस्ट के जरिये आप को प्रोग्रामिंग लैंग्वेज लो समझने और सीखने का बेस्ट और सबसे आसान तरीका बताऊंगा. इस बीच हमारी कोशिश रहेगी की कुछ और पोस्ट्स के बाद आप हर प्रोग्राम को अपने आप सोच सकें, यानी की आप अपना प्रोग्राम स्वयं लिख सकें.

ये पहला पोस्ट सिर्फ ये समझने के लिए है की प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज क्या होती हैं और इनको किस तरीके से सीखा जा सकता है. और साथ ही हम ये समझ पायें की एक बार अगर लॉजिक डेवेलोप हो गया तो हम कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को आसानी से समझ जाए और कम से कम समय में सीख जाएँ.
दोस्तों प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज का मतलब समझना जरूरी है.
जैसे हम लोग अपनी भाषा का प्रोयोग कर के एक दूसरे से अपने काम पूरा करवा पाते हैं, उसी तरह से अगर सामने वाला व्यक्ति आपकी लैंग्वेज को नहीं समझता तो आप उस के जरिये अपना काम नहीं करवा सकते क्योंकि वो आपकी प्रॉब्लम या आपके प्रश्न को नहीं समझ रहा, ऐसे में हम क्या करते हैं :
किसी ऐसे व्यक्ति को बीच में रख लेते हैं जो आपकी और उसकी .. दोनी की लैंग्वेजेज को जनता है, और बे व्यक्ति आपके प्रशन को दूसरे व्यक्ति को समझा देता है और उस व्यक्ति के उत्तर को वापिस अप की ही लैंग्वेज में समझा देता है! इस तरह के व्यक्ति को हम कहते हैं ‘इंटरप्रेटर’. अब हम ध्यान से देखे तो क्या होता है ? हमारे द्वारा दी हुई प्रॉब्लम या प्रश्न को लाइन बाई लाइन दूसरा व्यक्ति की लैंग्वेज में बदल / केन्वेर्ट कर के उसको बता देता है, और उसके द्वारा दिए गए उत्तर को भी वापिस हमारी लैंग्वेज में कन्वर्ट कर के हमे वापिस दे देता है!
ठीक इसी प्रकार जब हम किसी मशीन या कंप्यूटर से कुछ काम करवाना चाहते हैं, तब हमे कोई ऐसा टूल की आवश्यकता होती है लो हमारे द्वारा लिखी गयी भाषा को कंप्यूटर को समझा दे और कंप्यूटर या वो मशीन हमे वो रिजल्ट दे दे!
इसी एक्साम्प्ल को ध्यान में रखते हुए आइये हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को समझे!
कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए हमे एक ऐसी भाषा की आवश्यकता होती है जिसको कंप्यूटर समझ सके, एक्साम्प्ल के लिए ‘सी’ लैंग्वेज एक ऐसी लैंग्वेज है जिसमे हम अपना प्रोग्राम लिखते हैं! आइये इसको स्टेप बाई स्टेप समझे :
- हमने सी लैंग्वेज में प्रोग्राम लिख लिया जिसके द्वारा हमारा नाम कंप्यूटर की स्क्रीन पैर दिखाई देना चाहिए.
- अब प्रोग्राम को एक ऐसे माध्यम की आवश्यकता है जो सी के प्रोग्राम को कंप्यूटर की अपनी भाषा (इलेक्ट्रोनिक सिग्नल्स) में कन्वर्ट कर सके! इसके लिए ‘सी’ लैंग्वेज एक माध्यम ‘कोम्पाइलर’ का इस्तेमाल करता है!
- अब कम्पाइलर हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों (प्रोग्राम) को Executable फॉर्मेट में कन्वर्ट कर देता है.
- और जब हम उस Executable प्रोग्राम को चलाते हैं तो हमारी Output कंप्यूटर स्क्रीन पैर आ जाती है.
इसी तरह किसी भी प्रॉब्लम के हल को स्टेप बाई स्टेप लिखना ‘प्रोग्रामिंग’ कहलाता है !
प्रोग्राम को कंप्यूटर की लैंग्वेज में कन्वर्ट करना ‘कोम्पाइल’ करना कहलाता है! जिसके लिए हम लैंग्वेज के अनुसार ‘कम्पाइलर’ या ‘इंटरप्रेटर’ का प्रयोग करते हैं.
कंप्यूटर कन्वर्ट किये गए प्रोग्राम को स्टेप बाई स्टेप चलाता है और हमारी Output मिल जाती है!
अपने डर को निकालो और स्टेप बाई स्टेप लिख डालो, बन गया प्रोग्राम! लिखने के लिए एक कंप्यूटर लैंग्वेज की जरूरत होगी वो हम आगे सीखेंगे!


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